छल नीति

प्रस्तावना

धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण  के लिए कंपनी की स्थापना नियंत्रण  के विकास को सुगम बनाने के लिए हुई है जो की आईआईएफसीएल के विरुद्ध धोखाधड़ी के निरोध तथा जानकारी में सहायता करेगा| आईआईएफसीएल का अभिप्राय दिशानिर्देश प्रदान करने तथा जांच नियंत्रण और संचालन के विकास के लिए उत्तरदायित्व उल्लेखित करने के द्वारा नियमित संगठनीय व्यवहार को प्रगति देना है|  कॉर्पोरेट अभिशास्तर के उच्चतम क्रियान्वन के निरिक्षण के लिए धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण आदरपूर्वक स्वीकृति के लिए सूत्रित रूप में निम्नलिखित है|

नीति उद्देश्य

“धोखाधड़ी जानकारी  एवं निवारण नीति  का निर्माण धोखाधड़ी के जानकारी एवं निवारण की एक प्रणाली प्रदान करने के लिए, ऐसी धोखाधड़ी की रिपोर्ट तैयार करने के लिए जिसकी जानकारी है या शंका है तथा धोखाधड़ी से सम्बंधित विषयों की उचित परिणाम ज्ञात करने के लिए किया गया है| नीति सुनिश्चित करेगी तथा निम्नलिखित को प्रदान करेगी:- १) यह सुनिश्चित करने के लिए की प्रबंधन धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण के लिए तथा धोखाधड़ी और/या धोखाधड़ी के होने पर उसकी जानकारी से बचाव की प्रक्रिया स्थापित करने के लिए अपने उत्तरदायित्व से सचेत है| २) आई.आई.ऍफ़.सी.एल के कर्मचारियों तथा अन्य लेन-देन करने वालों का साफ़ मार्गदर्शन करना तथा उन्हें किसी गलत कार्य में शामिल होने से बचाना और धोखाधड़ी की क्रियाओं की शंका  होने पर उनके द्वारा कदम उठाया जाना| ३) धोखाधड़ी क्रियाओं में जांच-पड़ताल का संचालन करना| ४) यह सुनिश्चित करना की कोई या सभी संदेहित धोखाधड़ी क्रियाओं की सम्पूर्ण जांच की जाएगी|

नीति के उद्देश्य

यह नीति किसी धोखाधड़ी, संदेहित धोखाधड़ी में लागू होती है, जिसमे कर्मचारियों के साथ हिस्सेदार, सलाहकार, विक्रेता, देनदार, लेनदार, ठेकेदार, आईआईएफसीएल के साथ व्यापार कर रही बाह्य एजेंसियां, ऐसी एजेंसियों के कर्मचारी, और/या कोई अन्य दल जो आईआईएफसीएल के साथ व्यापारिक रिश्ते में हैं| 

धोखाधड़ी की परिभाषा

१) रिजेर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने धोखाधड़ी को परिभाषित किया है “ सभी दृष्टान्त जहाँ की बैंकों को लेखा की किताबों में मिथ्या-विवरण, चेक, ड्राफ्ट तथा बिल ऑफ़ एक्सचेंज जैसे यंत्रों के धोखे से भुनाने, बैंक के द्वारा लिए गए सेक्योरिटी के अनाधिकृत निर्वहन, गबन, चोरी, कोषों के दुरुपयोग, संपत्ति के रूपांतरण, छल, कमी, अनियमितता इत्यादि से बैंक को हुई हानि” २) भारतीय दंड संहिता का खंड २५ “ कोई भी व्यक्ति यदि उसने, परन्तु विपरीत नहीं, किसी ठगी की नियत से कोई काम किया है तो उसे धोखाधड़ी कहा जायेगा” | “ इसलिए धोखाधड़ी की व्याख्या की जा सकती है ” एक अपराधशील ठगी की क्रिया है जो या तो स्वयं नहीं तो दूसरे के साथ लाभ को ज्ञात करने के उस उद्देश्य से किया जाता है जिसके लिए कोई कानून रूप से अधिकृत नहीं है|

धोखाधड़ी निर्मित क्रियाएँ

धोखाधड़ी निर्मित क्रियाएँ जबकि धोखाधड़ी की क्रियाओं का एक विस्तार्क्षेरा हो सकता है, निम्नलिखित कुछ ऐसी क्रिया(एँ) हैं जो धोखाधड़ी कहलाती हैं| निम्नलिखित सूची केवल व्याख्यात्मक है ना की विस्तृत व्याख्या है:- 1) कंपनी से सम्बंधित किसी दस्तावेज या खाते में धोखाधड़ी या परिवर्तन| 2) चेक, बैंक ड्राफ्ट या कोई अन्य वित्तीय लेखा-पत्र में धोखाधड़ी या परिवर्तन| 3) कोष, ऋण-पत्र, पूर्ति या अन्य संपत्तियों का अवैध माध्यमों से दुरूपयोग| 4) सरकारी कागज-पत्र का असत्यीकरण जैसे की पे-रोल, या फाइल से दस्तावेजों को हटाना और/या नकली पत्र को उसके स्थान पर रखना| 5) नियुक्ति, पदानुग्रहण, रिपोर्ट के दाखिले, निविदा समिति सुझाव इत्यादि के संबंधों में तथ्यों का इच्छापूर्वक गमन/धोखा जिसके परिणामस्वरूप किसी एक के लिए अन्यायपूर्ण लाभ तथा अन्य के लिए अन्यायपूर्ण हानि हो| 6) कंपनी के वित्तकोष का निजी उद्देश्यों के लिए उपयोग| 7) समभरित नहीं हुए वस्तुओं या अर्पित नहीं की गई सेवाओं के लिए भुगतान को प्राप्त या प्राधिकृत करना| 8) भावी उद्देश्य से तथ्यों में हेर-फेर तथा निरूपण के लिए विनाश, निपटारे, कंपनी के रिकॉर्ड या अन्य संपत्तियों को हटाना जिससे शंका/दबाव/धोखा उत्पन्न हो सके जिसके परिणामस्वरूप वस्तुनिष्ठ निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सके| 9) कोई अन्य तथ्य जो की धोखाधड़ी क्रियाओं के क्षेत्र के अंतर्गत हो|  कर्मचारी के नैतिक या व्यवहारिक गतिविधि सम्बंधित शंकापूर्ण अनुपयुक्तताओं को मानव संसाधन के विभागीय प्रबंधन तथा कर्मचारी सम्बन्ध के द्वारा हल करना चाहिए ना की धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण नीति  के अंतर्गत हल करना चाहिए|

धोखाधड़ी निवारण के प्रति उत्तरदायित्व

i) सभी कर्मचारी ( पूर्ण-कालिक, अर्ध-कालिक, तदर्थ, अस्थायी, संविदा पर), विक्रेता के प्रतिनिधि, पूर्तिकर्ता, ठेकेदार, सलाहकार, देनदार, लेनदार, सेवा प्रदानकर्ता, या आईआईएफसीएल के साथ किसी प्रकार का व्यापार कर रही कोई अन्य एजेंसी से यह आशा की जाती है की वे अपने जिम्मवारी/नियंत्रण के क्षेत्र में किसी धोखाधड़ी के क्रिया के नहीं होने की पुष्टि करेंगे तथा जिम्मेवार होंगे| जैसे हीं यह ज्ञात हो की कोई धोखाधड़ी या शंकापूर्ण धोखाधड़ी हुई है या होने वाली है, विधि के अनुसार उन्हें उसकी जानकारी अतिशीघ्र सम्बंधित विभागाध्यक्ष  को देनी चाहिए| सभी विभागाध्यक्ष को धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण तथा उसके लिए कंपनी की नीतियों के कार्यान्वन को सुनिश्चित करना चाहिए| विभागाध्यक्ष को अपने नियंत्रण क्षेत्र में यन्त्र-रचना को सुनिश्चित करना चाहिए जिससे की:-i) प्रत्येक कर्मचारी को उनके क्षेत्र में हो सकने वाले अनुपयुक्तताओं परिचित कराया जा सके| ii) कर्मचारियों को धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण के सम्बन्ध में श्क्षित बनाना| iii) एक ऐसी संस्कृति का निर्माण करना जिसमे की कर्मचारियों को यह प्रोत्साहन दिया जाये की वे बिना किसी शिकार बनने के डर से किसी धोखाधड़ी या शंकापूर्ण धोखाधड़ी की जानकारी होने पर सूचना अवश्य दें| iv) कंपनी के द्वारा स्वीकृत कर्मचारियों के आचार नीतियों की सचेतना को बढ़ावा देना| 3)संगठन के ठेके, अनुदान, ऋणों/छूट/धन प्रदान समझौते के सामान्य परिस्थतियों में सुधार किया जायेगा जहाँ की ठेकेदार, प्रदानकर्ता/विक्रेयातागन/देनदार/लेनदार/सलाहकार इत्यादि को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है की वे आईआईएफसीएल के धोखाधड़ी जानकारी एवं निवारण नीति  पर अडिग रहेंगे तथा अन्य किसी ऐसे व्यक्ति को जो इस संस्थान के साथ काम कर रहे हैं , धोखाधड़ी क्रियाओं में लिप्त होने की स्वीकृति नहीं देंगे या इसके पाए जाने पर अतिशीघ्र संगठन को सूचना देंगे | यह परिस्थितियां ठेका/ऋण/छूट/अनुदान अर्जी सौंपते समय तथा  ठेका/ऋण/छूट/अनुदान के संचालन के समझौते के समय इस दस्तावेज का भाग हैं|

धोखाधड़ी की सूचना

i) सभी कर्मचारी, विक्रेता के प्रतिनिधि, पूर्तिकर्ता, ठेकेदार, सलाहकार, देनदार, लेनदार, सेवा प्रदानकर्ता, या आईआईएफसीएल के साथ किसी प्रकार का व्यापार कर रही कोई अन्य एजेंसी से यह आशा की जाती है की वे अपने जिम्मवारी/नियंत्रण के क्षेत्र में किसी धोखाधड़ी के क्रिया के ज्ञात होने उसकी जानकारी अतिशीघ्र देंगे| ऐसी सूचना पदानुग्रिहित शीर्ष अधिकारी को देनी चाहिए|यदि, हालाँकि, समय की कमी के स्थिति में, ऐसे रिपोर्ट को विभागाध्यक्ष को सौंपा जाना चाहिए जिसका कर्त्तव्य उसे प्राप्त करना तथा अतिशीघ्र शीर्ष अधिकारी को देना है| धोखाधड़ी की सूचना सामान्यतः लिखित होनी चाहिए| यदि सूचक लिखित रूप में नहीं देना चाहे, लेकिन इस स्थिति में है की धोखाधड़ी के क्रमिक तथा विशिष्ट लेन-देन को बता सकता है, तो जो अधिकारी या शीर्ष अधिकारी सूचना प्राप्त कर रहा है उसे लिखित रूप से सूचना दर्ज करनी चाहिए ठीक वैसा हीं जैसा सूचक ने दिया है तथा इस सूचना को देने वाले अधिकारी/कर्मचारी/अन्य व्यक्ति की पहचान का विवरण भी रखना चाहिए| सूचना को विश्वसनीयता से लेना चाहिए तथा जिस व्यक्ति को धोखाधड़ी या संभावित धोखाधड़ी दर्ज कराई गयी है उसे सूचक के सम्बन्ध में उसकी गोपनीयता का निर्वहन करना चाहिए और ऐसे तथ्यों को किसी भी परिस्थति में अनाधिकृत व्यतियों को नहीं बतलाना चाहिए| ii) धोखाधड़ी या संभावित धोखाधड़ी के सभी सूचनाओं पर अतिशीघ्र कार्य करना चाहिए तथा मनोनीत शीर्ष अधिकारी से सहयोग प्राप्त करना चाहिए| iii) संभावित धोखाधड़ी के बारे में ऐसी सूचना प्राप्त करने पर, शीर्ष अधिकारियों को सभी सम्बंधित दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए तथा अन्य प्रमाणों को तुरंत हिरासत में लेना चाहिए और उसे धोखाधड़ी के अपराधियों या उनसे प्रभावित अन्य अधिकारियो के द्वारा छेड़-छाड़ या मिटाए जाने या हटाये जाने से बचाना चाहिए|.

शीर्ष अधिकारी जांच विधि

i) शीर्ष अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा| वह कर्मचारी जो संभावित बेईमानी/धोखाधड़ी क्रियाओं की सूचना देता है उसे व्यक्तिगत रूप से संभावित धोखाधड़ी क्रियाओं की की जांच या साक्षात्कार/ पूछ-ताछ में भाग लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए| न ही सूचना देने वाले व्यक्तियों को निम्नलिखित सूचना ज्ञात होनी चाहिए: शंकित व्यक्ति से तथ्यों को जानने के लिए संपर्क का प्रयास नहीं करना चाहिए या केस, तथ्य, शक या मांग देयता पर चर्चा नहीं करनी चाहिए| जब तक शीर्ष अधिकारी द्वारा नहीं कहा जाये किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए| शीर्ष अधिकारी को अधिकारी अथवा विभागाध्यक्ष से प्राप्त हुई  सभी सूचनाओं को गोपनीयत रखना चाहिए| सभी आवश्यकतों की जांच में सर्वोच्च सुरक्षा रखनी चाहिए| जांच के स्थिति में किसी सूचना को  बाहर नहीं जाने देना चाहिए| किसी जाँच की उपयुक्त प्रतिक्रिया है : “मुझे इस तथ्य की चर्चा करने की इजाजत नहीं है|” किसी भी स्थति में दोष, अपराध, धोखाधड़ी, अनुपयुक्तता, या किसी अन्य सन्दर्भ पर दोषारोपण नहीं करना चाहिए| परिणाम सूचना को वैध व्यक्तियों को छोड़ कर किसी से चर्चा  नहीं करनी चाहिए| यह ऐसे व्यक्ति, जिस पर शंका थी परन्तु बाद में वह साफ़ दोषी नहीं पाया गया, के सम्मान को बचने में तथा कंपनी  को भावी लोक उत्तरदायित्व से बचाने के लिए आवश्यक है| यदि शीर्ष अधिकारी के जांच के पहले चरण में धोखाधड़ी की क्रियाओं को पाया जाता है, तो शीर्ष अधिकारी सक्षम  अधिकारी की स्वीकृति की मांग करता है, और आईआईएफसीएल की धोखाधड़ी/शंकित धोखाधड़ी विभाग को आगे के उपयुक्त जाँच तथा आवश्यक क्रिया के लिए मुख्य निगरानी अधिकारी को विवरण सौंपता है|  i) यह सूचना केस ले ख़ुफ़िया, सूचना तथा जांच को निगरानी विभाग द्वारा अपने दैनिक क्रियाओं में जाँच के लिए सम्मिलित की जाती है|  ii) निगरानी विभाग द्वारा जांच के पूर्ण किये जाने पर, उचित तथ उपयुक्त कदम, जिसमे प्रशासकीय कदम/अनुशासनीय कदम, जांच के परिणामस्वरूप, योग्य अधिकारी की स्वीकृति से, तथा आईआईएफसीएल के कर्मचारी अधिनियमों के प्रावधानों के अंतर्गत लेना चाहिए| उसके बाद, उसको लोक, अपराध क्रिया के योग्य अधिकारी के दिशानिर्देश से जांच समिति/बोर्ड को सौंपा जा सकता है|