हमारे बारे में

अनवरत आर्थिक विकास तथा आजीविका मानकों को प्रभावित करने के लिए आधारभूत संरचना कि महत्ता सर्वव्यापी मान्यता-प्राप्त है| इसके अतिरिक्त, सम्पूर्ण विश्व में लाखों लगों के पास, पीने के पानी कि सुविधा, उपयुक्त सफाई-व्यवस्था, बिजली तथा संचाल जाल का अभाव है| अपर्याप्त तथा असक्षम आधारभूत संरचना से उठ रहे उच्चतम लेन-देन मूल्यों ने अर्थव्यवस्थाओं को अपने सम्पूर्ण आर्थिक क्षमता को साकार करने से रोका है|

भारतीय परिपेक्ष में, जबकि आधारभूत संरचना में निवेश के आकर्षण में कुछ प्रगति हुई है, आधारभूत संरचना पर कुल वार्षिक निवेश कि तुलना अन्य एशियन देशों से कि जाए तब जहाँ उन देशो में यह १० प्रतिशत है, वहीँ पर भारत में यह अभी भी जी.डी.पी के ४ प्रतिशत के आस-पास है| भारतीय अर्थव्यवस्था का गतिविज्ञान आधारभूत संरचना को कड़ा अभियान चलाने में अवरोधक है|  भारत के माननीय वित्त मंत्री ने, एफ.वाई २००६ के लिए केंद्रीय आय-व्यय पत्र प्रस्तुत करते हुए, देश में पर्याप्त आधारभूत संरचना के निर्माण के महत्व तथा आवश्यकता को स्वीकृती दी तथा निम्लिखित घोषणा की:

“तीव्र आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है| भारत में सर्वाधिक सुस्पष्ट कमी आधारभूत संरचना के निवेश में कमी है तथा इसको आय-व्ययक के द्वारा वित्तपोषित करना जारी रखा जाएगा| हालाँकि, कई ऐसे आधारभूत संरचना परियोजनाएं हैं जो आर्थिक रूप से करने योग्य हैं, परन्तु वर्त्तमान स्थिति में, श्रोतों को इकठ्ठा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं| मई यह प्रस्ताव रखता हूँ की ऐसी परियोजनाओं को वित्तीय विशिष्ट वाहक के द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है......| एस.पी.वी का कार्य कर्ज देना होगा, विशिष्टतः दीर्घ-कालिक परिपक्वता का कर्ज, प्रत्यक्ष रूप से योग्य परियोजनाओं को जिससे की वे बैंक तथा वित्तीय संस्थानों से लिए कर्ज को परिशिष्ट कर सकें| सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के प्रारंभ में एस.पी.वी को ऋण सीमा की सूचना देगी|”

अनवरत आर्थिक विकास तथा आजीविका मानकों को प्रभावित करने के लिए आधारभूत संरचना कि महत्ता सर्वव्यापी मान्यता-प्राप्त है| इसके अतिरिक्त, सम्पूर्ण विश्व में लाखों लगों के पास, पीने के पानी कि सुविधा, उपयुक्त सफाई-व्यवस्था, बिजली तथा संचाल जाल का अभाव है| अपर्याप्त तथा असक्षम आधारभूत संरचना से उठ रहे उच्चतम लेन-देन मूल्यों ने अर्थव्यवस्थाओं को अपने सम्पूर्ण आर्थिक क्षमता को साकार करने से रोका है|

हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ८-९% के समान तथा नियमित विकास से सुगमित उच्चतम वक्र-पथ पर बढ़ने के साथ, आधारभूत संरचना क्षेत्र में निवेश को गति देने की सूक्ष्म आवश्यकता है| असल में, आधारभूत संरचना, अर्थव्यवस्था के गतिशील मजबूत विकास के मुख्य संचालक के रूप में उभरा है तथा सरकार अब आधारभू संरचना के विकास पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही है| यद्यपि आधारभूत संरचना में निजी निवेश के आकर्षण में वृद्धि हुई है, आधारभूत संरचना में कुल पूँजी निर्माण कुल (जी.सी.एफ) घरेलु उत्पाद (जी.डी.पी) के ५ प्रतिशत के आस-पास रहा है| ग्यारहवीं पंच-वर्षीय योजना (२००७-२०१२) में आधारभूत संरचना में जी.सी.एफ के स्तर को २०१२ तक जी.डी.पी का ९ प्रतिशत तक बढाने का विचार किया गया है, जिसके फलस्वरूप कुछ एशियन देशों के द्वारा प्राप्त स्तरों से मुकाबला किया जा सके|

भारत के माननीय वित्त मंत्री ने, केंद्रीय २००५-२००६ के केंद्रीय आय-व्ययक पत्र को प्रस्तुत करते हुए देश में पर्याप्त आधारभूत संरचना के निर्माण के महत्व तथा आवश्यकता को स्वीकृती दी जब उन्होंने निम्नलिखित घोषणा की:

“तीव्र आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है| भारत में सर्वाधिक सुस्पष्ट कमी आधारभूत संरचना के निवेश में कमी है तथा इसको आय-व्ययक के द्वारा वित्तपोषित करना जारी रखा जाएगा| हालाँकि, कई ऐसे आधारभूत संरचना परियोजनाएं हैं जो आर्थिक रूप से करने योग्य हैं, परन्तु वर्त्तमान स्थिति में, श्रोतों को इकठ्ठा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं| मै यह प्रस्ताव रखता हूँ की ऐसी परियोजनाओं को वित्तीय विशिष्ट वाहक के द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है......| एस.पी.वी का कार्य कर्ज देना होगा, विशिष्टतः दीर्घ-कालिक परिपक्वता का कर्ज, प्रत्यक्ष रूप से योग्य परियोजनाओं को जिससे की वे बैंक तथा वित्तीय संस्थानों से लिए कर्ज को परिशिष्ट कर सकें| सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के प्रारंभ में एस.पी.वी को ऋण सीमा की सूचना देगी|”


भारत सरकार ने इसके फलस्वरूप विशिष्ट उद्देश्य वाहन के द्वारा सुगम आधारभूत संरचना परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए एक योजना को स्वीकृति दे दी, जिसे विस्तीर्णता से एस.आई.एफ.टी.आई कहा गया|

तदानुसार, भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड (आई.आई.एफ.सी.एल) को जनवरी २००६ में पूरी तरह से भारतीय सरकार द्वारा स्वामित्व निगम के रूप में स्थापित किया गया तथा अप्रैल २००६ में अपनी क्रियाओं का आरम्भ किया| 

आई.आई.एफ.सी.एल: आधारभूत संरचना में उत्प्रेरक विकास

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड (आई.आई.एफ.सी.एल) एस.आई.एफ.टी.आई के सन्दर्भ में देश में विभिन्न साध्य आधारभूत परियोजनाओं को दीर्घ-कालिक वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है| निगम की अधिकृत पूँजी ५००० करोड़ है, तथा प्रदत्त पूँजी वर्त्तमान में २५०० करोड़ है| आई.आई.एफ.सी.एल बाह्य वाणिज्यिक उधार-ग्रहण के द्वारा घरेलु बाजार से दीर्घ-कालिक कर्ज, द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय संस्थानों से कर्ज तथा विदेशी मुद्रा उत्पन्न करता है| निगम के उधार को शाशकीय जमानत का समर्थन प्राप्त है|

व्यापारिक प्रदर्शन (३१ मार्च २०१२ के अनुसार) समेकित स्तर पर

  • अप्रैल २००६ में अपने आरम्भ के लघु अवधि के भीतर, निगम ने २६७ आधारभूत संरचना परियोजनाओं को रु ५८५.६८ बिलियन तक का ऋण की संस्वीकृति दी है|

  • २६७ सहायतार्थ परियोजनाएं देश के २४ राज्यों में फैली हैं|

  • १७६ परियोजनाओं में रु २२५.४३ बिलियन तक का भुगतान किया जा चुका है|

वित्तीय प्रदर्शन(एफ.वाई २०११-२०१२) समेकित स्तर पर

आई.आई.एफ.सी.एल अपने कार्य के पहले वर्ष से ही मुनाफे में चल रही है| निगम ने अपने अच्छे प्रदर्शन को बाद के वर्षों में भी जारी रखा है| वित्तीय वर्ष २०११-२०१२ के लिए समरूप का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है| 

  • ३१ मार्च २०११ को ४.९२ बिलियन दर्ज हुए कर के पहले के लाभ में १०२% बढ़ोतरी कर ३१ मार्च २०१२ को समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में बढ़ाकर ९.९२ बिलियन कर दिया गया|

  • मानक ऋण संपत्तियों के प्रावधान को बढ़ाकर रु ५१७.३६ मिलियन कर दिया गया

  • ३१ मार्च २०११ को २.१६ बिलियन दर्ज हुए आधारभूत संरचना संचय में बढ़ोतरी कर उसे ३१ मार्च २०१२ को २.१६ बिलियन कर दिया गया|

  • ३१ मार्च २०११ को ३.३० बिलियन दर्ज हुए कर के बाद के लाभ में ३१ मार्च २०१२ को समाप्त हो रहे वर्ष में ९.९२ बिलियन होने पर १०६% बढ़ोतरी की बढोतरी हुई||
     

२०११-१२ के दौरान नवीन पहलें

आई.आई.एफ.सी.एल परियोजनाएं लिमिटेड: फ़रवरी २०१२ में,  आई.आई.एफ.सी.एल ने परियोजना मूल्यांकन तथा संघ प्रकाशन सेवाओं सहित परियोजना सलाह सेवाएँ देने के लिए आई.आई.एफ.सी.एल परियोजनाएं लिमिटेड नामक एक नियंत्रित निगम की स्थापना की| नियंत्रित निगम परियोजना विकास सेवाएँ भी उपलब्ध कराएगी जिसमे साध्यता अध्ययन निर्माण, परियोजना संरचना, वित्तीय संरचना तथा विस्तृत व्यपारिक स्थिति का विकास शामिल हैं|

आई.आई.एफ.सी.एल आधारभूत संरचना ऋण कोष: आई.आई.एफ.सी.एल ने सह-प्रायोजकों/निवेशकों के साथ अनुमानित यू.एस$१ बिलियन के मूल्य के संग्रह कोष की स्थापना के लिए आधारभूत संरचना ऋण कोष (आई.डी.एफ) के स्थापना की विधि को प्रारंभ किया है जिसमें पारस्परिक कोष मार्ग के द्वारा अनुमानित रु १५ बिलियन निवेश किया जा सकता है|


डी.एम.आई.डी.सी
में एकुइटी स्टेक: आई.आई.एफ.सी.एल आधारभूत संरचना ने दिल्ली मुंबई औद्योगिक प्रकम्पा विकास निगम में हिस्सा प्राप्त कर लिए जो की ३१ मार्च, २०१२ के अनुसार कुल हिस्से का अनुमानित ४१% है|

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड


भारत के माननीय वित्त मंत्री ने, केंद्रीय २००५-२००६ के केंद्रीय आय-व्ययक पत्र को प्रस्तुत करते हुए देश में पर्याप्त आधारभूत संरचना के निर्माण के महत्व तथा आवश्यकता को स्वीकृती दी जब उन्होंने निम्नलिखित घोषणा की:

“तीव्र आर्थिक विकास के लिए आधारभूत संरचना के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता है| भारत में सर्वाधिक सुस्पष्ट कमी आधारभूत संरचना के निवेश में कमी है तथा इसको आय-व्ययक के द्वारा वित्तपोषित करना जारी रखा जाएगा| हालाँकि, कई ऐसे आधारभूत संरचना परियोजनाएं हैं जो आर्थिक रूप से करने योग्य हैं, परन्तु वर्त्तमान स्थिति में, श्रोतों को इकठ्ठा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं| मै यह प्रस्ताव रखता हूँ की ऐसी परियोजनाओं को वित्तीय विशिष्ट वाहक के द्वारा वित्तपोषित किया जा सकता है......| एस.पी.वी का कार्य कर्ज देना होगा, विशिष्टतः दीर्घ-कालिक परिपक्वता का कर्ज, प्रत्यक्ष रूप से योग्य परियोजनाओं को जिससे की वे बैंक तथा वित्तीय संस्थानों से लिए कर्ज को परिशिष्ट कर सकें| सरकार प्रत्येक वित्त वर्ष के प्रारंभ में एस.पी.वी को ऋण सीमा की सूचना देगी|”

भारत सरकार ने इसके फलस्वरूप विशिष्ट उद्देश्य वाहन के द्वारा सुगम आधारभूत संरचना परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने के लिए एक योजना को स्वीकृति दे दी, जिसे विस्तीर्णता से एस.आई.एफ.टी.आई कहा गया|

तदानुसार, भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड (आई.आई.एफ.सी.एल) को जनवरी २००६ में पूरी तरह से भारतीय सरकार द्वारा स्वामित्व निगम के रूप में स्थापित किया गया तथा अप्रैल २००६ में अपनी क्रियाओं का आरम्भ किया| 

आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

आई.आई.एफ.सी.एल की दृष्टि

“भारत में विश्व स्तरीय आधारभूत संरचना का विकास तथा प्रचार के लिए नवीन वित्तपोषक हल प्रदान करना|”


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

आई.आई.एफ.सी.एल का लक्ष्य

आधारभूत संरचना के वित्तपोषण के लिए उच्चतम अभ्यास को अपनाना तथा आधारभूत संरचना विकास को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय योग्यता का विकास करना| सेवाओं को पेशेवर ढंग से देने के लिए तथा सभी हिस्सेदारों की संतुष्टि के लिए उच्चतम व्यस्त कर्मचारियों के दल का निर्माण करना|

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

 

              श्री एस.के.गोएल 
                          सभापति तथा  & प्रबंध निर्देशक


श्री एस.के.गोएल  ने अपनी पेशे की शुरुआत बैंक ऑफ़ बरोदा में एक अधिशाशक के रूप में की थी| अपने दीर्घ तथा विविध अनुभवों के दौरान, उन्होंने लोक क्षेत्रीय बैंकों में विभिन्न पदों पर काम किया है, जिसमे आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया तथा अलाहाबाद बैंक, यूको बैंक तथा आई.आई.बी.आई शामिल है| श्री एस.के.गोएल अगस्त २००७ से जून २०१० तक यूको बैंक के सभापति तथा  & प्रबंध निर्देशक रह चुके हैं|    उनके नेतृत्व के अन्दर यूको ने कृषि क्षेत्र में ऋणदान से अप्रतिम वृद्धि प्राप्त की, माइक्रो प्रतिष्ठानों तथा एम.एस.एम.ई के ऋणदान में श्रेष्ठता को जी.ओ.आई तथा माननीय प्रधानमन्त्री द्वारा यथावत मान्यता मिली, जिससे की यूको बैंक को दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया| श्री गोएल ने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनोमिक्स से प्रथम श्रेणी में वाणिज्य से स्नाकोत्तर प्राप्त किया है| उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एल.एल.बी की पढाई पूरी की| वह भारतीय बैंकर्स संस्थान के प्रमाणित सहयोगी सदस्य भी हैं|

       
        

 

 

 

 

         श्रीमति सिन्धुश्री खुल्लर
        सचिव, योजना आयोग
        सरकार मनोनीत निर्देशक
श्रीमति सिन्धुश्री खुल्लर भारतीय प्रशाशनिक सेवा की १९७५ वर्ग की यू.टी कैडर की अधिकारी हैं| श्रीमति खुल्लर ने अंग्रेजी साहित्य में दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया तथा जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से समाजशाश्त्र में स्नाकोत्तर किया| उन्होंने बोस्टन युनिवर्सिटी, मस्सचुसेत्त्स, यू.एस.ए से विकासशील अर्थशाश्त्र में स्नाकोत्तर किया है| भारत में प्रबंधन तथा वित्तीय प्रबंधन में विभिन्न आतंरिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के अतिरिक्त, श्रीमति खुल्लर ने १९९१ में हारवर्ड

युनिवर्सिटी से लोक प्रशाशन में भी स्नाकोत्तर प्राप्त किया|

 

१९७५ में भारतीय प्रशाशनिक सेवा में नियुक्ति के उपरांत, मिस खुल्लर केंद्रीय तथा राज्य सरकारों में विभिन्न संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण कार्य सम्पादन किया है| उन्होंने १९८६ से १९८९ तक कर्मचारी मंत्री, लोक मनोमालिन्य तथा आँतरिक सुरक्षा के ओ.एस.डी के पद पर कार्य किया है तथा १९९१ से १९९२ तक वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री के निजी सचिव के पद पर कार्य किया है| फ़रवरी २००४ से अप्रैल २००७ तक नई दिल्ली

युनिवर्सिटी से लोक प्रशाशन में भी स्नाकोत्तर प्राप्त किया|

१९७५ में भारतीय प्रशाशनिक सेवा में नियुक्ति के उपरांत, मिस खुल्लर केंद्रीय तथा राज्य सरकारों में विभिन्न संवेदनशील तथा महत्वपूर्ण कार्य सम्पादन किया है| उन्होंने १९८६ से १९८९ तक कर्मचारी मंत्री, लोक मनोमालिन्य तथा आँतरिक सुरक्षा के ओ.एस.डी के पद पर कार्य किया है तथा १९९१ से १९९२ तक वाणिज्य तथा उद्योग मंत्री के निजी सचिव के पद पर कार्य किया है| वह फ़रवरी २००४ से अप्रैल २००७ तक नई दिल्ली नगरनिगम महापालिका, दिल्ली की सभापति थी तथा उसके बाद वित्त मंत्रालय, आर्थिक कार्य विभाग में अतिरिक्त सचिव & विश्हिष्ट सचिव के पद पर कार्य किया|
She was Secretary , Ministry of Youth
मामलों  and Sports till 30th March, 2012 before joining as Secretary Planning Commission on 2nd

                           
                       

                      

        श्री डी.के. मित्तल
        सचिव,  वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार
        सरकार मनोनीत निर्देशक






 

 

       श्री राजेश खुल्लर
       संयुक्त सचिव, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार
       सरकार मनोनीत निर्देशक





राजेश खुल्लर १९८८ वर्ग के आई.इ.एस (हरियाणा कैडर) के अधिकारी हैं| उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से भौतिकीशाश्त्र में स्नाकोत्तर की डिग्री में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया | उनकी सामाजिक उद्देश्यों के प्रति वचनबद्धता उनकी जीवन-चर्या के प्रारंभ से ही स्पष्ट थी जब उन्होंने १९९४ ‘अपनी बेटी’, ‘अपना धन’ योजना की कल्पना की| उन्होंने जिलाधीश के पद पर दो बार कार्यरत रहे, पहली बार १९९५-९६ में सोनीपत और १९९९ से २००१ तक रोहतक| कृषि विभाग के निर्देशक के रूप में, उन्हें इस बात का श्रेय जाता है की उन्होंने किसानों को ‘साठी’(ग्रीष्म धान) के उपज से उत्तीर्न्तापूर्वाक छुड़ा लिया|  जुलाई २००७ से जुन २००९ तक जब वे नगर निगम, फरीदाबाद के आयुक्त के रूप में नियुक्त थे, उन्हें  .भारतीय सरकार द्वारा, जवाहर लाल नेहरु अर्बन रिनिवल मिशन के अंतर्गत उनके ग्रीन यातायात माध्यम के द्वारा टिकाऊ शहरी गतिशीलता के लिए एवार्ड ऑफ़ एक्स्सेलेंस प्रदान किया गया | नगर निगम, गुडगाँव के आयुक्त के अंतिम पदग्रहण के दौरान, उन्होंने शहर को मवेशियों से मुक्त कराया तथा २१वीं सदी के लोगों की आशाओं के अनुरूप प्रलेख तैयार किये|



 

     

                  श्री के.आर.कामत 
                  सी.एम्.डी पंजाब नेशनल बैंक
                  निर्देशक




श्री के.आर.कामत पंजाब नेशनल बैंक के सभापति तथा प्रबंध निर्देशक हैं| वे पुर्व में अलाहाबाद बैंक के सी.एम्.डी थे| वह भारतीय बैंक एसोशिअशन के प्रबंधकीय समिति, इंडियन स्कूल ऑफ़ बैंकिंग एंड फाईनांस के शासकिय परिषद् के सदस्य हैं| उन्हें बैंकिंग उद्योग में अनुमानित ३५ सालों का ठोस अनुभव प्राप्त है|   
 


 
             

                  

                   प्रो रघुराम
                   आंशिक गैर-अधिशाषी निर्देशक




प्रो. रघुराम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी), चेन्नई से स्नातक है तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद से एम.बी.ए हैं| उनके पास आधारभूत संरचना सम्बंधित क्रियाओं में विशाल अनुभव है| उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय समितियों तथा अकादमी, शोध, गृह, व्यवसायिक, तथा निगम जैसे पर्यटन परिषद्, संचालन समिति- लौजिसटिकस संस्थान, सी.आई.आई, चेन्नई, लौजिसटिक् परिषद्, सी.आई.आई गुजरात, अहमदाबाद, समाकलित लोक यातायात प्रणाली, जी.आई.डी.बी की सदस्यता प्राप्त है|


 

 

 

 

    श्री हरी संतोष कुमार
आंशिक गैर-अधिशाषी निर्देशक

 

श्री हरी संतोष कुमार १९७५ बैच के भारतीय सुरक्षा लेखा सेवा के अधिकारी हैं|भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड में सम्मिलित होने से पूर्व, श्री हरी संतोष कुमार भारत सरकार के अंतर्गत सुरक्षा लेखा विभाग में अतिरिक्त कंट्रोलर जेनेरल सुरक्षा लेखा के पद पर कार्यरत थे|
उन्हें वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में बैंकिंग खंड में कार्य करने का अनुभव प्राप्त है| उन्होंने एन्जिनीर्स इंडिया लिमिटेड तथा गेल लिमिटेड में मुख्य निगरानी  अधिशासक के रूप में कार्य किया है|


 

 

 

          

         प्रो. वि.वेंकट.रमण
        आंशिक गैर-अधिशाषी निर्देशक

    प्रो.वी.वेंकट.रमण  वर्तमान में हैदराबाद विश्वविद्यालय (संसद की धारा के अंतर्गत स्थापित एक केंद्रीय               विश्वविद्यालय) में स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ के डीन हैं|


प्रो. वेंकट रमण स्नाकोत्तर हैं तथा उन्हें व्यापारिक प्रबंधन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त है तथा ढाई दशकों से अधिक का विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसायिक अनुभव है जिसमे अध्ययन, शोध, उद्योग तथा सामान्य प्रबंधन के क्षेत्रों में परामर्श, निगम योजना, बैंकिंग तथा सेवा क्षेत्र प्रबंधन शामिल हैं| प्रो वी.रमण के पास शैक्षणिक प्रशासक के रूप में विशाल अनुभव है और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए विविध पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं जिनमे सामान्य तथा प्रबंधकीय शिक्षा मुख्य हैं| वे बहुत सारे राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठीयों तथा अधिवेशनों में वक्ता रह चुके हैं| वे विभिन्न विश्वविद्यालयों के समिति में शामिल हैं और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में सलाहकार हैं|


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड





भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम (यू.के) लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम (यू.के) लिमिटेड को फ़रवरी २००८ [निगम सं ६४९६६६१] में लन्दन में रजिस्ट्रार पंजीयन, इंग्लैंड तथा वेल्स के पास यू.के निगम धारा, १९८५ के अंतर्गत समाविष्ट किया गया जिससे की   उन भारतीय निगमों को ऋण देने के लिए जो भारत में आधारभूत संरचना के क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं, या ऐसे परियोजनाओं के लिए बाह्य वाणिज्यिक ऋणों को सह-वित्तपोषित करने के लिए, जो पूरी तरह से भारत के बाहर पूँजी व्यय के लिए है| निगम यू.के की वित्तीय सेवाएँ प्राधिकार से पंजीकृत हैं जैसा की अनुच्छेदक-१ में २२०७ के यू.के मनी लौंडरिंग रेग्युलेशन्स की सम्मति के लिए वित्तीय संस्थान दिया गया है| आई.आई.एफ.सी (यू.के) लिमिटेड की अधिकृत पूँजी यू.एस.डी ५०० मिलियन है तथा निगम की वर्त्तमान भुगतान पूँजी यू.एस.डी ५० मिलियन है|


आई.आई.एफ.सी.एल परियोजनाएं लिमिटेड

आई.आई.एफ.सी.एल परियोजनाएं लिमिटेड की स्थापना फरवरी २०१२ में इस उद्देश्य से हुई की वह आधारभूत संरचना क्षेत्र में अंतरों को भरे, भारत सरकार के प्रयासों को बढ़ावा देना तथा योजना प्रक्षेपण को वास्तविक प्रत्यक्षीकरण में बदलने के लिए आधार प्रदान करे|


निगम आधारभूत संरचना क्षेत्र के संपूर्ण वर्णक्रम जैसे सड़कें, राजमार्ग परियोजनाएं, बंदरगाहें, अंतर्देशीय जलमार्ग या अंतर्देशीय बंदरगाहें, जल आपूर्ति परियोजनाएं, सिचाईं परियोजनाएं, जल निरूपण प्रणाली, सफाई व्यवस्था तथा मॉल निकास व्यवस्था प्रणाली या ठोस अवशेष प्रबंधन प्रणाली, दूरसंचार सेवाएँ, औद्योगिक पार्क या विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र, परिष्कृत कृषि-उत्पाद के संरक्षण तथा संग्रह के लिए निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों का निर्माण इत्यादि के लिए सलाहकारी सेवाओं की मांग को पूरा करेगी|


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड


भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड



कार्य क्षेत्र

आई.आई.एफ़.सी.एल वाणिज्यिक योग्यता आधारभूत संरचना परियोजनाओं को दीर्घ-कालीन वित्तपोषक सहायता प्रदान करने में व्यस्त है जिसमे की देश में पी.पी.पी परियोजनाओं को दबाने की प्राथमिकता निम्नलिखित निर्दिष्ट क्षेत्रों में है जैसे

सड़कें तथा पुल, रेलवे, बंदरगाह, हवाईअड्डा, अंतर्देशीय जलमार्ग, तथा अन्य यातायात परियोजनाएं|
• बिजली
• शहरी यातायात, जल निरूपण, सफाई व्यवस्था, ठोस अवशेष प्रबंधन तथा शहरी क्षेत्रों में अन्य भौतिक आधारभूत संरचनाएं
• गैस पाइपलाइन
• विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों में आधारभूत परियोजनाएं|
• अंतर्राष्ट्रीय परंपरागत केंद्र तथा अन्य पर्यटन आधारभूत संरचनाएं
• कोल्ड स्टोरेज चेन
• गोदाम
• खाद निर्माण उधोग
वित्तपोषण के माध्यम:
निगम वित्तीय सहायता निम्नलिखित के द्वारा प्रदान करती है:
• दीर्घ-कालीन ऋण;
•  बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों को उनके द्वारा ऋण दान के लिए पुनर्भुगतान |

• Takeout वित्तपोषण
• अधीनस्थ ऋण
• समय दर समय वित्त मंत्रालय द्वारा स्वीकृत कोई अन्य माध्यम|

 नवीन योजना कार्यान्वन (मार्गदर्शक  लेन-देन के आधार पर)

ऋण बढ़ोतरी :


५ जनवरी २०१२ को, मार्गदर्शक  लेन-देन की पुष्टि के लिए आई.आई.ऍफ़.सी.एल ने ऋण बढ़ोतरी योजना को प्रारंभ किया तथा  माननीय वित्त मंत्री के उपस्थिति में पहली ऋण बढ़ोतरी योजना के संचालन की घोषणा की| एशियन डेवलपमेंट बैंक (ए.डी.बी) आई.आई.ऍफ़.सी.एल के अधीन परियोजना खतरेके ५०% तक की बैकस्टॉप गारंटी सुविधा प्रदान कर के सहारा देने की वचनबद्धता के लिए इस प्रयास में भाग ले रही है|  मार्गदर्शक  चरण में ४-५ मार्गदर्शक s को लिया | आई.आई.ऍफ़.सी.एल ने पहली मार्गदर्शक  लेन-देन के लिए ऋण बढ़ोतरी योजना के अंतर्गत मूलभूत स्वीकृति दे दी है जिससे की  दीर्घ-कालीन कोषों को आधारभूत संरचना क्षेत्र की और untapped श्रोतों से जैसे बीमा निगम तथा पेंशन क्कोश इत्यादि के मार्ग निर्माण हो सके| ऋण बढ़ोतरी योजना  परियोजना विकासकर्ताओं को बोंड बाजार से सस्ते दरों पर कोष जुटाने में सहायता करेगी तथा इसके परिणामस्वरूप भारत में निगमित बोंड बजार के विकास में सहायता प्रदान करेगा|

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड

भारतीय आधारभूत संरचना वित्त निगम लिमिटेड