रूपरेखा

इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनैंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल)

 

भावी वित्‍तपोषण की नींव

भारत सरकार के पूर्ण स्‍वामित्‍वाधीन आईआईएफसीएल की स्‍थापना वर्ष 2006 में की गई थी जिसका मुख्‍य उद्देश्‍य इंडिया इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनैंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) नामक विशेष प्रयोजन माध्‍यम व्‍यापक तौर पर सिफ्टी के रूप में संदर्भित के माध्‍यम से व्‍यावहारिक अवरंचना परियोजनाओं को दीर्घावधि ऋण उपलब्‍ध कराना है।

आईआईएफसीएल से वित्‍तीय सहायता के पात्र क्षेत्र भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यथा अनुमोदित एवं समय-समय पर संशोधित अवसंरचना उप क्षेत्र की समन्वित सूची के अनुसार होते हैं। इन क्षेत्रों में आम तौर पर परिवहन, ऊर्जा, जल, स्‍वच्‍छता, संचार, सामाजिक व वाणिज्यिक अवसंरचना शामिल हैं।

आईआईएफसीएल सितंबर, 2013 से भारतीय रिजर्व बैंक से एनबीएफसी-एनडी के तौर पर पंजीकृत कंपनी है।

30 जून, 2016 को कंपनी की प्राधिकृत व चुकता पूंजी क्रमश: 5,000 रूपये एवं 3,900 करोड़ रूपये  रही।

स्‍टैंडअलोन आधार पर आईआईएफसीएल ने 390 से अधिक परियोजनाओं को प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत 69,700 करोड़ रूपये से अधिक राशि का संचयी सकल संस्‍वीकृतियां की एवं 30 जून, 2016 तक पुनर्वित्‍त व टेकआउट फाइनेंस के तहत संवितरण सहित 49,000 करोड़ रूपये से अधिक का संचयी संवितरण किया।

वर्तमान प्रस्‍ताव

आईआईएफसीएल ने निम्‍नलिखित उत्‍पादों/सेवाओं के माध्‍यम से अवसंरचना क्षेत्र को अपनी वित्‍तीय सहायता पेश की हैं:

ग्रीनफील्‍ड  परियोजना के लिए

प्रत्‍यक्ष ऋण

 

 

 

 

 

अधिमानी कर्ज: सहायता संघ के भाग के तौर पर आईआईएफसीएल कुल परियोजना लागत (गौण कर्ज यदि कोई हो सहित) के 20 प्रतिशत तक के निवेश को ध्‍यान में रखते हुए वाणिज्यिक रूप से व्‍यावहारिक अवसंरचना परियोजनाओं को दीर्घावधि निधि उपलब्‍ध कराता है। जन निजी भागीदारी परियोजनाओं जिनमें समापन पर प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य बाईबैक का प्रावधान है  के मामले में आईआईएफसीएल अन्‍य ऋणदाताओं की तुलना में अधिक से अधिक अवधि के ऋण का प्रस्‍ताव कर सकता है एवं अन्‍य ऋणदाताओं को भुगतान करते हुए एकमात्र ऋणदाता बन सकता है यदि आवश्‍यक हो।

गौण कर्ज: आईआईएफसीएल  परियोजना लागत (कुल परियोजना लागत के 20 प्रतिशत के अपने निवेशे के भाग के तौर पर) गौण कर्ज उपलब्‍ध कराता है। कर्ज का यह स्‍वरूप आमतौर पर ऋणदाताओं क्षरा अर्ध इक्विटी के तौर पर समझा जाता है।

30 जून, 2016 तक स्‍टैंडअलोन आधार पर आईआईएफसीएल ने प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत 390 से अधिक परियोजनाओं को 69,700 करोड़ रूपये से अधिक राशि का संचयी सकल संस्‍वीकृतियां की एवं योजना के तहत संवितरण सहित 31,200 करोड़ रूपये से अधिक का संचयी संवितरण किया।

ब्राउनफील्‍ड  परियोजना के लिए

टेकआउट फाइनेंस

आईआईएफसीएल की टेकआउट वित्‍त योजना का उद्देश्‍य बैंकों की बही से ऋण लेने बैंकों के सामने आ रही आस्ति देयता असंतुलन एवं निवेश की बाधाओं का समाधान करना है। यह योजना बैंकों को अपनी निधियों की नई अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश करने में सहायता करती है। आईआईएफसीएल कुल परियोजना लागत (प्रत्‍यक्ष ऋण साहित) का  30 प्रतिशत तक का ऋण प्रदान कर सकता है। टेकआउट वित्‍त के मामले में संवितरण वास्‍तविक वाणिज्यिक तिथि (सीओडी) के एक वर्ष पश्‍चात ही किया जा सकता है।

आईआईएफसीएल ने 30 जून, 2016 तक टेकआउट वित्‍त योजना के तहत 59 परियोजनाओं में लगभग 14,900 करोड़ रूपये की संचयी निवल संस्‍वीकृतियां की एवं 12,300 करोड़ रूपये से अधिक राशि संवितरित की।

 

ऋण वृद्धि योजना

ऋण वृद्धि योजना के तहत आईआईएफसीएल मौजूदा ऋणों का पुनर्वित्‍त करने के लिए एए अथवा उससे अधिक की रेटिंग वाली अवसंरचना कंपनियों को जारी बांडों की ऋण रेटिंग बढ़ाने के लिए अपनी आंशिक ऋण गारंटी प्रदान करता है। आईआईएफसीएल परियोजनागत बांडों की कुल राशि के अधिकतम 50 प्रतिशत के अधीन कुल परियोजना लागत (बैकस्‍टॉप गारंटीकर्ता के साथ कुल परियोजनागत लागत का 40 प्रतिशत) के 20 प्रतिशत की सीमा तक की ऋण वृद्धि कर सकता है।

ऋण वृद्धि बीमा व पेंशन निधि जैसे निवेशकों जैसे बांडों से दीर्घावधि की निधियों के वितरण का सुलभ बनाता है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) आईआईएफसीएल के अंतर्निहीत जोखिम की 50 प्रतिशत के लिए आईआईएफसीएल को बैकस्‍टॉप गारंटी सुविधा प्रदान कर रहा है।

 

योजना के तहत आईआईएफसीएल द्वारा प्रदत्‍त आंशिक ऋण गारंटी द्वारा वर्धित ऋण रेटिंग के साथ 451 करोड़ रूपये का प्रथम बांड निर्गम सितंबर, 2015 में सफलतापूर्व प्रस्‍तुत किया गया था। वर्ष के दौरान सौर उर्जा परियोजना के लिए जुटाए गये 126.7 करोड़ रूपये के बांड के साथ योजना के तहत दूसरा लेनदेन भी पूरा किया गया। आईआईएफसीएल ऐसे अनेक लेनदेनों पर कार्य कर रहा है।

 

संस्‍थानों के लिए

पुनर्वित्‍त योजना

आईआईएफसीएल बैंकों एवं अन्‍य पात्र वित्‍तीय संस्‍थानों (एफआई) को अवसंरचना परियोजनाओं को अपना ऋण प्रदान करने के लिए पुनर्वित्‍त प्रदान करता है।

आईआईएफसीएल ने 30 जून, 2016 तक पुनर्वित्‍त योजना के तहत 6,200 करोड़ रूपये से अधिक का संचयी संवितरण किया।

सहायक कंपनियां

आईआईएफसी (यूके) लि.:  आईआईएफसीएल ने अप्रैल, 2008 में अपने पूर्ण स्‍वामित्‍वाधीन सहायक कंपनी आईआईएफसी (यूके) की स्‍थापना की जिसका उद्देश्‍य देश में अवसंरचना परियोजनाओं का कार्यान्‍वयन करने वाली भारतीय कंपनियों को विशेष तौर पर पूंजीगत उपकरणों के आयात के लिए विदेशी मुद्रा में वित्‍तपोषण करना है। आईआईएफसी (यूके) ने 30 जून, 2016 तक 1.87 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का संचयी संवितरण किया।

आईआईएफसीएल  प्रोजेक्‍ट्स लि. (आईपीएल): आईपीएल, आईआईएफसीएल की 100 प्रतिशत सहायक कंपनी की स्‍थापना वर्ष 2012 में की गई जिसका मुख्‍य उद्देश्‍य परियोजना का मूल्‍यांकन एवं समूहन सेवाओं के अलावा व्‍यावहारिक अध्‍ययन संचालित करना, परियोजनागत संरचना, वित्‍तीय संरचना एवं विस्‍तृत कारोबारी मामलों के विकास सहित परियोजनागत विकास वकी सेवाओं के साथ परामर्शी सेवाएं उपलब्‍ध कराना है।

आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटैड (आईएएमसीएल) : आईआईएफसीएल ने आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फड आधारित अवसंरचना ऋण निधि (आईडीएफ) का प्रबंध करने के लिए 100 प्रतिशत सहायक कंपनी यानि आईआईएफसीएल एसेट मैनेजमैंट कंपनी लिमिटैड (आईएएमसीएल) गठित की। आईआईएफसीएल म्‍युचुअल फंड द्वारा फरवरी, 2014  को निजी स्‍थानन के माध्‍यम से अपनी पहली आईडीएफ योजना का शुभारंभ किया गया। पूरे अभिदान के आधार पर इस योजना ने बांबे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध किए जाने वाली देश में पहली आईडीएफ म्‍यूचुअल फंड होने का गौरव प्राप्‍त किया।

आईएएमसीएल वर्तमान में दो नई योजनाएं शुरू करने की प्रक्रिया में है दोनों को घरेलू क्रेडिट एजेंसियों द्वारा एएए एमएफ-आईडीएफकी रेटिंग दी गई जिसमें से 1500 करोड़ रूपये की एक योजना अवसंरचना क्षेत्र पर केंद्रित है जबकि 1,000 करोड़ रूपये की निधि वाली दूसरी योजना हरित पहल (सौर एवं पवन ऊर्जा, कचरे से ऊर्जा, जल व स्‍वच्‍छता इत्‍यादि) पर केंद्रित है।

वित्‍तपोषण के स्रोत

आईआईएफसीएल घरेलू के अतिरिक्‍त अंतरराष्‍ट्रीय दोनों बाजारों से दीर्घावधि स्रोतों से निधियां जुटाता है।

घरेलू

आईआईएफसीएल प्रयोजन के लिए सृजित विभिन्‍न यथोचित साधनों के माध्‍यम से बाजार से कर्ज (अल्‍पावधि एवं दीर्घावधि दोनो) जुटाता है। 30 जून, 2016 तक कंपनी ने घरेनू बाजार से लगभग 32,600 करोड़ रूपये  जुटाये।

अंतराष्‍ट्रीय

आईआईएफसीएल ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी), विश्‍व बैंक, केएफडब्‍ल्‍यू, यूरोपीय निवेश बैंक (ईआईबी) एवं जापान इंटनरेशनल कोओपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) जैसे द्विपक्षीय एवं बहुपपक्षीय संस्‍थानों से मजबूत संबंध स्‍थापित किए हैं एवं इन संस्‍थानों से क्रमश: 1.9 बिलियन अमरीकी डॉलर, 195 मिलियन अमरीकी डॉलर, 50 मिलियन यूरो, 200 मिलियन यूरो एवं 50 बिलियन जेपीवाई की दीर्घावधि अल्‍लप लागत ऋण व्‍यवस्‍था हासिल की है।

इन संबंधों से आईआईएफसीएल को अल्‍प लागत दीर्घावधि संसाधन जुटाने में मदद मिली जो नवोन्‍मेषी वित्‍तीय उत्‍पादों के विकास के अतिरिक्‍त बेहतर प्रथाओं विशेष तौर पर पर्यावरणीय एवं सामाजिक सुरक्षा ढांचा एवं खरीद प्रक्रियाओं के संबंध में को अपनाने में सामर्थ्‍यकारी हैं।

रेटिंग

आईआईएफसीएल की विभिन्‍न घरेलू दीर्घवधि उधारियों (बांडों) को विभिन्‍न रेटिंग एजेंसियों द्वारा एएए/एएए(एसओ)की रेटिंग दी गयी है।

 

आईआईएफसीएल एक नजर में

 

प्रमुख वित्‍तीय विवरण

राशि करोड़ रूपये में

ब्‍यौरे

मार्च, 2013 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्ष

मार्च, 2014 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्ष

 

मार्च, 2015 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्ष

 

मार्च, 2016 को समाप्‍त वित्‍तीय वर्ष

कुल आस्तियां

34,880

38,756

39,064

42,274 

निवल मूल्‍य ( वित्‍तीय वर्ष के 31 मार्च को)

4,858

5,782

6,796

7,265

निवल लाभ

1,047

521

753

468

अवसंरचना ऋण

24,152

23,881

26,995

31,612

नोट: वर्ष 2015;16 के आंकड़े लेखा परीक्षा के अधीन हैं।

 

आईआईएफसीएल का क्षेत्र-वार निवेश

प्रत्‍यक्ष ऋण के तहत संचयी सकल संस्‍वीकृतियां (30 जून, 2016 तक)

राशि करोड़ रूपये में

क्षेत्र

परियोजनाओं की संख्‍या

परियोजना की लागत

संवितरित राशि

सड़क

 214 

 235,592 

 31,704 

विद्युत

 117 

 312,035 

 29,103 

विमानपत्‍तन

 2 

 25,801 

 2,150 

पत्‍तन

 14 

 16,613 

 2,182 

शहरी अवसंरचना

 10 

 47,327 

 3,600 

रेलवे

 2 

 2,594 

 519 

पीएमडीओ*

 38 

 8,602 

 259 

दूरसंचार

 1 

 3,750 

 250 

कुल

 398 

 652,314 

 69,767 

 

क्षेत्र-वार संचयी संवितरण (30 जून, 2016 तक)

राशि करोड़ रूपये में

क्षेत्र

परियोजनाओं की संख्‍या

परियोजना की लागत

संवितरित राशि

सड़क

 168 

 176,964 

 15,553 

विद्युत

 67 

 188,585 

 13,548 

विमानपत्‍तन

 2 

 25,801 

 846 

पत्‍तन

 8 

 7,823 

 662 

शहरी अवसंरचना

 4 

 1,467 

 210 

 पीएमडीओ

 27 

 4,744

 151 

दूरसंचार

 1 

 3,750

 248 

उप योग

 277 

 409,134 

 31,217 

पुनर्वित्‍त

 

 

 6,256 

टेकआउट वित्‍त

 

 

12,325

कुल योग

 

 

49,798